Covid-19 : दिल्ली के लोग भूलते जा रहे हैं ‘जबतक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं’


दिल्ली के सरोजनी नगर मार्केट की यह भीड़ बताती है कि हम कोरोना संक्रमण के मामले में बेहद लापरवाह हो चुके हैं.

दिल्ली के सरोजनी नगर मार्केट की यह भीड़ बताती है कि हम कोरोना संक्रमण के मामले में बेहद लापरवाह हो चुके हैं.

महज 42 सेकेंड का यह वीडियो सरोजनी नगर मार्केट के आज का हाल बता रहा है. वीडियो में मास्क लगाए लोग तो दिख रहे हैं, पर दो लोगों के बीच जो तय दूरी होनी चाहिए वह नहीं दिख रही. हमारी ऐसी लापरवाहियां कोरोना की चेन तोड़ेंगी नहीं, बल्कि उसे जोड़ेंगी, मजबूत करेंगी.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 22, 2020, 4:18 PM IST

नई दिल्ली. दिल्ली की हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक फिलहाल दिल्ली में कोरोना संक्रमण के 39,741 एक्टिव मामले हैं. दिल्ली में अब तक कोरोना संक्रमण के कुल 5 लाख 23 हजार 117 मामले सामने आ चुके हैं. पर दिल्ली के बाजारों में हो रही भीड़ यह बात चीख-चीख कर कह रही है कि दिल्लीवाले इस बीमारी को लेकर सतर्क नहीं.

ऐसी लापरवाहियों से कोरोना की चेन टूटेगी नहीं, जुटेगी

इस खबर के साथ लगा यह वीडियो सरोजनी नगर मार्केट का है. महज 42 सेकेंड का यह वीडियो किसी पर्व-त्यौहार के वक्त के बाजार का नहीं, बल्कि आज का है. वीडियो में मास्क लगाए लोग तो दिख रहे हैं, पर दो लोगों के बीच जो तय दूरी होनी चाहिए वह नहीं दिख रही. जाहिर है कि हमारी ऐसी लापरवाहियां कोरोना की चेन को तोड़ेंगी नहीं, बल्कि उसे जोड़ेंगी, मजबूत करेंगी.

सरोजनी नगर मार्केट का यह वीडियो देखें :

पब्लिक को आत्ममंथन की जरूरत

बात-बात पर हम सरकारों को कोसने के अभ्यस्त हो चुके हैं. इस कोरोना के मुद्दे पर केंद्र हो या राज्य सरकार वह अपनी पूरी ताकत से जुटी है आपकी जान बचाने को, पर हम हैं कि मानने को तैयार नहीं. वीडियो में दिख रही इस भीड़ में दिख रहे लोगों का तर्क हो सकता है कि बेहद जरूरी होने पर ही हम मार्केट गए थे. पर सच तो यह है कि हमें आत्ममंथन करने की जरूरत है.

हमने फर्क मिटा दिया

दिल्ली और देश के लोगों को यह समझने की जरूरत है कि फिलहाल तभी घर से निकलें जबतक अनिवार्य न हो. सरोजनी नगर मार्केट में दिख रही यह भीड़ बतला रही है कि हमने उस फर्क को मिटा दिया है जो जीवन रक्षक जरूरत और सामान्य जरूरत के बीच होता है. सरकारें कह रही हैं कि जबतक अनिवार्य न हो, घर से न निकलें. और हम हैं कि अपने शौक पूरा करने के लिए भी घर से निकल रहे हैं.

मुद्दई चुस्त-गवाह सुस्त

सरकारें और अदालतें हमें लगातार आगाह कर रही हैं कि कोरोना की स्थिति विस्फोटक है. वह इस विस्फोटक स्थिति पर नियंत्रण के लिए हमारे तमाम धार्मिक और सांस्कृतिक-सामाजिक आयोजनों पर अंकुश लगा रही है, पर हम हैं कि अपनी रुचियों-इच्छाओं पर अंकुश लगाने को तैयार नहीं. खुद पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है, वर्ना इस बीमारी को रोकने के लिए लॉकडाउन ही एकमात्र विकल्प होगा.



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