जाति को लेकर राजद विधायक और मुख्य पार्षद आमने सामने, डेहरी नगर परिषद बना राजनीतिक अखाड़ा


नगर परिषद की मुख्य पार्षद विशाखा सिंह (दाएं) और राजद विधायक फतेह बहादुर सिंह आमने सामने आ गए हैं.

नगर परिषद की मुख्य पार्षद विशाखा सिंह (दाएं) और राजद विधायक फतेह बहादुर सिंह आमने सामने आ गए हैं.

एमएलए का कहना है कि महाराष्ट्र की पिछड़ी जाति की विशाखा सिंह बिहार की अति पिछड़ा सीट से कैसे चुनी जा सकती हैं, जबकि विशाखा सिंह का कहना है कि इस मुद्दे पर पहले ही उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है.

सासाराम. रोहतास जिले के डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद की मुख्य पार्षद विशाखा सिंह और डेहरी के राजद विधायक फतेह बहादुर सिंह आमने सामने आ गए हैं. राजद विधायक का आरोप है कि विशाखा सिंह महाराष्ट्र के नागपुर की पिछड़ी जाति से हैं और उन्होंने बिहार में एक सवर्ण से अंतरजातीय विवाह किया है. ऐसी परिस्थिति में वे बिहार में अति पिछड़ा के आरक्षित सीट का लाभ कैसे उठा रही हैं? वहीं, दूसरी ओर मुख्य पार्षद विशाखा सिंह का कहना है कि किसी भी लड़की की जाति उसके पिता से तय होती है. महाराष्ट्र के जाति प्रमाण पत्र के आधार पर ही बिहार में भी उन्होंने जाति प्रमाण पत्र बनवाया है. उसी के आधार पर वह डेहरी नगर परिषद के अति पिछड़ा की आरक्षित सीट से मुख्य पार्षद चुनी गई हैं. उनका आरोप है कि विधायक अनावश्यक रूप से नगर परिषद में दखलअंदाजी करना चाहते हैं. उसी को लेकर विवाद खड़ा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण पत्र को लेकर पहले भी मामला उठा था, जिस पर जांच भी हो चुकी है.

राजद विधायक फतेह बहादुर सिंह का तर्क

डेहरी के राजद विधायक फतेह बहादुर सिंह का कहना है कि डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद की मुख्य पार्षद विशाखा सिंह महाराष्ट्र के नागपुर की रहने वाली है. वे महाराष्ट्र सरकार के अनुसार पिछड़ी जाति से आती हैं. लेकिन बिहार में अति-पिछड़ा जाति के प्रमाण पत्र के आधार पर वह मुख्य पार्षद बनी हैं. जो सरासर धोखा है. राजद MLA का कहना है कि मुख्य पार्षद विशाखा सिंह जिस जाति से आती हैं, उसे महाराष्ट्र सरकार ने पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में रखा है. जबकि डेहरी के नगर परिषद में मुख्य पार्षद का पद अति पिछड़ा जाति के लिए आरक्षित है.

मुख्य पार्षद विशाखा सिंह का पक्षडेहरी-डालमियानगर नगर परिषद की मुख्य पार्षद विशाखा सिंह का कहना है कि उनके विपक्षियों ने 4 साल पहले भी इस मामले को उठाया था. लेकिन सरकारी स्तर पर जब इसकी जांच की गई तो फैसला उनके पक्ष में आया था. उन्होंने विधायक पर आरोप लगाया कि वह नगर परिषद की स्वायत्तता में बेवजह दखलअंदाजी कर रहे हैं. शहर का तेजी से विकास हो रहा है. साथ ही भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाया गया है. जिसको लेकर विधायक बौखलाए हुए हैं और बेवजह मामले को तूल देकर नगर परिषद को राजनीति का अखाड़ा बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

जिलाधिकारी को लिखा पत्र

बता दें कि राजद विधायक फतेह बहादुर सिंह ने इस मामले को लेकर जिलाधिकारी को लिखा है. साथ में मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है. दूसरी ओर विशाखा सिंह इसे पूरी तरह से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बता रही हैं.








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