जब वाजपेयी जी खुशी में शाहनवाज हुसैन के लगा लेले गला, जानीं पूरा मामला!


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शाहनवाज हुसैन बहुत कम उमिर में भाजपा के बड़का नेता बन गइल रहन. अपना काबिलियत से बहुत जल्दिये ऊ अटल बिहारी वाजपेयी अउर लाकृष्ण आडवाणी के भरोसा जीत लेले रहन.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 21, 2021, 6:59 PM IST

शाहनवाज हुसैन बहुत कम उमिर में भाजपा के बड़का नेता बन गइल रहन. अपना काबिलियत से बहुत जल्दिये ऊ अटल बिहारी वाजपेयी अउर लाकृष्ण आडवाणी के भरोसा जीत लेले रहन. डिप्लोमा इंजीनियरिंग के पढ़ाई करे वला शाहनवाज हुसैन भाषण में माहिर हवें. इहे भाषण कला उनकर किस्मत के कमल खिलावे में सबसे बड़ मददगार साबित भइल. भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी खुद शाहनवाज हुसैन के भाषण के मुरीद रहन. एही खूबी से बाजपेयी जी एक बेर शाहनवाज हुसैन के गला लगा लेले रहन. शाहनवाज हुसैन अगर भारत के सबसे कम उमिर (32 साल) के कैबिनेट मंत्री बने में सफल भइले तs उनकर योग्यता के ही सबूत बा. बाजेपयी जी काहे शाहनवाज हुसैन के राजनीति में आगा बढ़वले ? ई सवाल के जबाब में ही छिपल बा कि शाहनवाज हुसैन बिहार काहे अइले ?
बिहार के राजनीति में शाहनवाज हुसैन
भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन अब बिहार के राजनीत में दम-खम देखाइहें. पहिले विरोधी दल के लोग कहत रहे कि भाजपा दुनिया के सबसे बड़का पार्टी हs लेकिन ओकरा भिरी बिहार में कवनो चुनावी चेहरा नइखे. इहे सवाल के जबाब देवे खातिर शाहनवाज हुसैन के दिल्ली से पटना बोलावल गइल बा. आजाद बिहार के 73 साल के इतिहास में आज ले एक्के मुस्लिम मुख्यमंत्री बनल बाड़े. कांग्रेस नेता अब्दुल गफूर जुलाई 1973 से अप्रैल 1975 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहन. एकरा बाद कवनो पार्टी मुसलमान नेता के ना तs सीएम बनवलस, ना प्रोजेक्ट कइलस. ईहां तक कि फरवरी 2005 में रामविलास पासवान, लालू जादव अउर नीतीश कुमार के सामने शर्त रखले रहन कि अगर कवनो मुस्लिम नेता के सीएम बनावल जाई तब्बे ऊ समर्थन दे सकेले. लेकिन ना लालू जादव तइयार भइले ना नीतीश कुमार. अब अगर भाजपा 2025 में शाहनवाज हुसैन के सीएम उम्मीदवार मान के चुनाव लड़े तs बिहार के राजनीत में तहलका मचल तय बा. खैर, ई तs दूरंदेसी सोच बा. फिलहाल तs शाहनवाज हुसैन के नीतीश के साथे एनडीए के पारी जमावे खातिर बिहार के सियासी पिच पs बोलावल गइल बा.
शाहनवाज हुसैन काहे अइले बिहार ?शाहनवाज हुसैन के शांत चित्त अउर जहीन नेता मानल जाला. 2009 के लोकसभा चुनाव (भागलपुर) में जितला के बाद एक तरह से उनकर चुनावी राजनीत ठप पड़ गइल रहे. 2014 में हार गइले. 2019 में भागलपुर के सीट नीतीश कुमार लेले. एकरा चलते शाहनवाज हुसैन के नीतीश से खटपट भी भइल. ऊ सात साल से कवनो सदन के सदस्या ना रहन. बहुत लोग तs इहे कहे लागल कि अब उनकर एकबाल खतम हो रहल बा. लेकिन एकरा बादो शाहनवाज विरोध में एक लफज ना कहले. भाजपा जवन भी काम देलस ऊ मन लगा के कइले. पार्टी खातिर जीव-जान से समर्पित रहले. शाहनवाज के इहे खूबी कबो बाजपेयी जी के मन मोहले रहे. अब नरेनदर मोदी भी उनकर मुरीद हो गइले. शाहनवाज हुसैन नीतीश कुमार के साथे वाजपेयी जी के सरकार में काम कइले बाड़े. एक दोसरा के करीब से जनले-समझले बाड़े. बोली के मीठ शाहनवाज हुसैन फैसला लेवे में बहुत कठोर हवें. ऊ बिहार में नीतीश के बराबरी में भाजपा के राजनीत कर सकेले.
काम के इनाम
शाहनवाज हुसैन कुल्लम 30 साल के उमिर में बाजपेयी जी के सरकार में राज्य मंत्री बनल रहन. 32 साल के भइले तs बाजपेयी जी उनका के स्वतंत्र प्रभार के साथे कोयला राज्यमंत्री बना देले. कोयला मंत्री के रूप में शाहनवाज हुसैन छवे महीना में अतना मन लगा के काम कइले कि बाजपेयी जी खुश हो गइले. एकर इनाम मिलल. सितम्बर 2001 में वाजपेयी जी शाहनवाज हुसैन के कैबिनेट मंत्री बना के सब केहूं के अचरज में डाल देले. 32 साल में ही ऊ नागरिक उड्डयन मंत्री बन गइले. एह तरे ऊ सबसे कम उमिर में कैबिनेट मंत्री बने के कमाल कइले. एक दिन शाहनवाज हुसैन नमाज पढ़े दिल्ली के मस्जिद में गइल रहन. उहां कुछ लोग से उन कर बकझक हो गइल. अखबार में जब ई घटना के खबर छपल तs बाजपेयी जी चिंता में पड़ गइले. ओही घरी अटल जी फोन कर के सब बात मालूम कइले.

जब वाजपेयी जी शाहनवाज के गला से लगवले
घटना के अगिला दिन सांसद के आपन चेम्बर में बाजपेयी जी शाहनवाज हुसैन के बोलवले. हालचाल पूछले. फेन शांत आवाज में कहले, आपको संसद में अयोध्या मुद्दे पर बोलना है. एकरा बाद शाहनवाज हुसैन संसद में अयोध्या मुद्दा पs भाषण देले. वाजपेयी जी संसद भवन के अपना चेम्बर में बइठ के शाहनवाज के भाषण सुनत रहन. अयोध्या के मुद्दा ओह घरी बहुत संवेदनशील विषय रहे. मुस्लिम समाज में भाजपा के राजनीति के लेके बहुत शक-सवाल रहे. कुछ दिन पहिले ही अयोध्या मुद्दा पs बाजपेयी जी के एक बेयान से हंगामा मच गइल रहे. तेरह दिन संसद ठप हो गइल रहे. अब एह विषय पs भाजपा के एक मुसलमान मंत्री के बोलल आसान ना रहे. लेकिन शाहनवाज हुसैन पूरा तइयारी से लोकसभा में भाषण देले. जब भाषण खत्म भइल तs उनका भिरी वाजपेयी जी के एगो पुर्जी पहुंचल, आकर चेम्बर में मिलिए. शाहनवाज हुसैन प्रधानमंत्री के चेम्बर में पहुंचले. उनका देख के वाजपेयी खाड़ा हो गइले. पहिले पीठ थपथपवले, फेन अंकवारी में भर के गला मिला लेले. ई उनकर शानदार भाषण के यादगार इनाम रहे. वाजपेयी जी के परीक्षा में पास शाहनवाज हुसैन अब बिहार के राजनीति के धार दिहें. (लेखक अशोक कुमार शर्मा जी वरिष्ठ स्तंभकार हैं.)







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